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कोर्ट ने एसआई समेत 6 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का दिया आदेश

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रुड़की। हरिद्वार जिले में रुड़की के पास माधोपुर गांव में बीते साल 25 अगस्त 2024 को जिम ट्रेनर वसीम उर्फ मोनू की तालाब में डूबकर मौत हो गई थी। इस मामले में अब करीब एक साल बाद कोर्ट ने उत्तराखंड पुलिस के गौ स्क्वायड टीम के उप निरीक्षक समेत तीन नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। ये आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरिद्वार अविनाश कुमार श्रीवास्तव को कोर्ट ने दिया है।
इसी के साथ कोर्ट ने इस सनसनीखेज मामले में सीओ रैंक के अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने के आदेश भी दिए हैं। दरअसल, वसीम की मौत 25 अगस्त 2024 को हुई थी। पुलिस के मुताबिक वसीम प्रतिबंधित मांस की तस्करी कर रहा था और पकड़े जाने के डर से तालाब में कूदा था, जिससे उसकी डूबने से मौत हो गई थी। हालांकि परिजनों में पुलिस टीम पर युवक की हत्या का आरोप लगाया था। बता दें कि 25 अगस्त साल 2024 को सोहलपुर गाड़ा गांव निवासी वसीम उर्फ मोनू की माधोपुर गांव के तालाब के पानी में डूबने से मौत हो गई थी, लेकिन परिजन पुलिस की इस थ्योरी पर विश्वास ही नहीं कर रहे हैं। उनका आरोप है कि गौ संरक्षण स्क्वायड टीम ने सुनियोजित तरीके से मोनू की हत्या की है। अगस्त 2024 में ये मामला खासा चर्चाओं में रहा था। देशभर में इस मामले पर राजनीति भी हुई थी।
कई संगठनों ने धरना-प्रदर्शन कर पुलिसकर्मियों की केस दर्ज करने की मांग थी। लेकिन घटना के एक साल बाद भी पुलिस ने इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया था। वहीं पुलिस पर मुकदमा दर्ज करने के लिए मोनू के परिजनों की तरफ से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता सज्जाद अहमद की मजबूत पैरवी के चलते कोर्ट ने मृतक जिम ट्रेनर वसीम उर्फ मोनू के चचेरे भाई के प्रार्थना पत्र पर तीन नामजद उपनिरीक्षक शरद सिंह, कांस्टेबल सुनील सैनी, कांस्टेबल प्रवीण सैनी समेत अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ 24 घंटों के भीतर गंगनहर कोतवाली पुलिस को संबंधित धाराओं में केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा कोर्ट ने एसएसपी हरिद्वार को सनसनीखेज प्रकरण की सीओ रैंक के अधिकारी से निष्पक्ष जांच करने के आदेश भी दिए गए हैं।

Dobry News
Author: Dobry News

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