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बनभूलपुरा हिंसा मामलाः थानाध्यक्ष का तबादला, जांच के लिए एसआईटी गठित

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नैनीताल। बनभूलपुरा हिंसा के दौरान गोली लगने से फईम की मौत की जांच सीबीआई से कराए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान गुरूवार को सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि घटना की जांच कर रहे जांच अधिकारी थानाध्यक्ष बनभूलपुरा नीरज भाकुनी का स्थान्तरण पिथौरागढ़ कर दिया गया है और मामले की जांच के लिये एसआईटी गठित कर दी गई है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खण्डपीठ में हुई। खण्डपीठ ने विगत दिवस 18 जून को फईम हत्याकांड की जाँच एसआईटी से कराने व जाँच अधिकारी नीरज भाकुनी का जिले से बाहर तबादला करने को कहा था। पूर्व में कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि जांच अधिकारी खुद इस मामले की जाँच कर रहा है और अंतिम रिपोर्ट भी खुद ही पेश कर रहा है। यह अपने आप मे एक अनोखी जांच की जा रही है। जबकि आरोपियों के खिलाफ हत्या करने आरोप लगे हुए हैं।
बता दें कि मृतक के भाई परवेज ने याचिका दायर कर कहा है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल ने पुलिस को 6 मई 2024 को निर्देश दिए थे कि मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें। लेकिन आज तक पुलिस ने इसकी जांच नहीं की। इसलिए उसे मामले की सीबीआई से जांच कराने व परिवार को सुरक्षा दिलाए जाने को लेकर याचिका दायर करनी पड़ी। याचिकाकर्ता का कहना है कि 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा हिंसा के दौरान फईम की गोली लगने से मौत हो गयी थी। उसके बाद परिजनों ने इसकी जांच कराने के लिए पुलिस व प्रशासन को कई बार शिकायत दर्ज कराई। लेकिन पुलिस ने न तो इसकी जांच की और न ही मुकदमा दर्ज किया।
नैनीताल। बनभूलपुरा हिंसा के दौरान गोली लगने से फईम की मौत की जांच सीबीआई से कराए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान गुरूवार को सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि घटना की जांच कर रहे जांच अधिकारी थानाध्यक्ष बनभूलपुरा नीरज भाकुनी का स्थान्तरण पिथौरागढ़ कर दिया गया है और मामले की जांच के लिये एसआईटी गठित कर दी गई है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खण्डपीठ में हुई। खण्डपीठ ने विगत दिवस 18 जून को फईम हत्याकांड की जाँच एसआईटी से कराने व जाँच अधिकारी नीरज भाकुनी का जिले से बाहर तबादला करने को कहा था। पूर्व में कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि जांच अधिकारी खुद इस मामले की जाँच कर रहा है और अंतिम रिपोर्ट भी खुद ही पेश कर रहा है। यह अपने आप मे एक अनोखी जांच की जा रही है। जबकि आरोपियों के खिलाफ हत्या करने आरोप लगे हुए हैं।
बता दें कि मृतक के भाई परवेज ने याचिका दायर कर कहा है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल ने पुलिस को 6 मई 2024 को निर्देश दिए थे कि मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें। लेकिन आज तक पुलिस ने इसकी जांच नहीं की। इसलिए उसे मामले की सीबीआई से जांच कराने व परिवार को सुरक्षा दिलाए जाने को लेकर याचिका दायर करनी पड़ी। याचिकाकर्ता का कहना है कि 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा हिंसा के दौरान फईम की गोली लगने से मौत हो गयी थी। उसके बाद परिजनों ने इसकी जांच कराने के लिए पुलिस व प्रशासन को कई बार शिकायत दर्ज कराई। लेकिन पुलिस ने न तो इसकी जांच की और न ही मुकदमा दर्ज किया।

नैनीताल। बनभूलपुरा हिंसा के दौरान गोली लगने से फईम की मौत की जांच सीबीआई से कराए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान गुरूवार को सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि घटना की जांच कर रहे जांच अधिकारी थानाध्यक्ष बनभूलपुरा नीरज भाकुनी का स्थान्तरण पिथौरागढ़ कर दिया गया है और मामले की जांच के लिये एसआईटी गठित कर दी गई है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खण्डपीठ में हुई। खण्डपीठ ने विगत दिवस 18 जून को फईम हत्याकांड की जाँच एसआईटी से कराने व जाँच अधिकारी नीरज भाकुनी का जिले से बाहर तबादला करने को कहा था। पूर्व में कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि जांच अधिकारी खुद इस मामले की जाँच कर रहा है और अंतिम रिपोर्ट भी खुद ही पेश कर रहा है। यह अपने आप मे एक अनोखी जांच की जा रही है। जबकि आरोपियों के खिलाफ हत्या करने आरोप लगे हुए हैं।
बता दें कि मृतक के भाई परवेज ने याचिका दायर कर कहा है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल ने पुलिस को 6 मई 2024 को निर्देश दिए थे कि मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें। लेकिन आज तक पुलिस ने इसकी जांच नहीं की। इसलिए उसे मामले की सीबीआई से जांच कराने व परिवार को सुरक्षा दिलाए जाने को लेकर याचिका दायर करनी पड़ी। याचिकाकर्ता का कहना है कि 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा हिंसा के दौरान फईम की गोली लगने से मौत हो गयी थी। उसके बाद परिजनों ने इसकी जांच कराने के लिए पुलिस व प्रशासन को कई बार शिकायत दर्ज कराई। लेकिन पुलिस ने न तो इसकी जांच की और न ही मुकदमा दर्ज किया।

Dobry News
Author: Dobry News

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