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क्राॅतिकारियों की गंगा: वीरांगना दुर्गा भाभी

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जो सुनहरे अक्षरों में लिखे जाने चाहिए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश वे इतिहास के पन्नों में कहीं गुम हो गए। ऐसी ही एक महान क्रांतिकारी थीं – दुर्गा भाभी। जिनका असली नाम दुर्गावती देवी था और जो भगत सिंह, राजगुरु, और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे महान योद्धाओं की संगिनी /महिला क्रान्तिकारी रहीं।

साण्डर्स वध के बाद, जब लाहौर की धरती भगत सिंह और राजगुरु के लिए सुरक्षित नहीं रही, तब दुर्गा भाभी ने अंग्रेजी हुकूमत की आँखों में धूल झोंक कर, उन्हें लाहौर से कलकत्ता तक सुरक्षित पहुँचाया। वे एक अंग्रेज अफ़सर की बीवी के रूप में भगत सिंह की पत्नी बनीं और अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देते हुए उनके सामने से होकर निकल गईं। यह केवल साहस नहीं, बल्कि अद्भुत योजना, संयम और bravery का परिचायक था।

उनके पति, भगवती चरण वर्मा, भी एक महान क्रांतिकारी थे। ऐतिहासिक सत्य है कि चंद्रशेखर आज़ाद के पास अंतिम समय में जो Mauser pistol थी, वह दुर्गा भाभी ने ही दी थी। वह न केवल क्रांतिकारियों की रक्षक बनीं, बल्कि कई भूमिगत गतिविधियों की सक्रिय सहयोगी थी दुखद बात यह है कि 14 अक्टूबर 1999 को उनका गुमनामी में निधन हो गया। न तो सरकार ने उन्हें कोई राष्ट्रीय सम्मान दिया, न किसी स्कूल या कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखा गया, और न ही कोई memorial या statue उनके योगदान को दर्शाता है। यहाँ तक कि आज़ाद भारत की जनता भी उन्हें लगभग भूल चुकी है।

आज जब हम स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद अपने अधिकारों का उपभोग कर रहे हैं, हमें याद रखना चाहिए कि

यह आज़ादी केवल गांधी के “बिना खड्ग, बिना ढाल” सिद्धांत से नहीं मिली, बल्कि न जाने कितने revolutionaries ने अपने प्राणों की आहुति दी।

1857 का विद्रोह और उसके बाद के अनेक armed resistance movements इस सत्य के गवाह हैं। गांधी ने भले ही अहिंसा का रास्ता चुना, लेकिन अंग्रेजों को खौफ केवल क्राॅतिकारियो का ही था उसी काल में दुर्गा भाभी जैसी वीरांगनाएँ gun और disguise के साथ मैदान में डटी थीं।

आज आवश्यकता है कि हम ऐसे क्रांतिकारियों को mainstream historical discourse में स्थान दें। Patriotism केवल एक दिन तिरंगा फहराने से नहीं, बल्कि इतिहास की सच्चाई को स्वीकारने और ऐसे वीरों को उचित सम्मान देने से प्रकट होता है।

शत् शत् नमन दुर्गा भाभी को। आइए, हम सब यह संकल्प लें कि हम उन्हें और उनके जैसे वीरों को न भूले, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बलिदानों की गाथा सुनाएँ।डोब्रे न्यूज के आने वाले कान्क्लेव 2025 में एक सत्र महान क्रांतिकारी दुर्गा भाई पर रखा गया है।जहाॅ पर देशवासी उन्हें अपनी पुष्पाॅजलि अर्पित करेंगे।

Dobry News
Author: Dobry News

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